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अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों को, आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवा का अवसर, खेल मंत्री रेखा आर्या।
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सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने की, सैनिक कल्याण विभाग की समीक्षा।
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राजस्व न्यायालयों के लंबित वादों पर, डीएम डॉ0 आशीष चौहान सख्त, स्मार्ट मॉनिटरिंग से तय होगी जवाबदेही।
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खाद्य मंत्री रेखा आर्या ने धान खरीद सत्र 2026-27 की तैयारियों को लेकर की बैठक, 7 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का रखा गया लक्ष्य।
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मुख्य सचिव ने टिहरी लेक एरिया का, मास्टर प्लान और जोनल प्लान तैयार करने के दिए निर्देश।
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पर्वतारोहियों का साहस, अनुशासन और टीम भावना युवाओं के लिए प्रेरणादायी, मुख्यमंत्री धामी।
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तलाकशुदा मुस्लिम महिला भी सीआरपीसी के तहत अपने पूर्व पति से मांग सकेंगी गुजारा भत्ता, जानें क्या है CRPC की धारा 125

तलाकशुदा मुस्लिम महिला भी सीआरपीसी के तहत अपने पूर्व पति से मांग सकेंगी गुजारा भत्ता, जानें क्या है CRPC की धारा 125

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के हित में बड़ा फैसला सुनाया है. इसके तहत अब मुस्लिम महिलाएं भी अपने पति के खिलाफ सीआरपीसी की धारा-125 के तहत अपने भरण-पोषण के लिए याचिका दायर कर पाएंगी. देश के सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से उन मुस्लिम महिलाओं को बड़ी सहायता मिलेगी जिनका तालक हो चुका है और जो अकेले रहने के लिए मजबूर हैं.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने तेलंगाना के मुस्लिम व्यक्ति की याचिका को खारिज करते हुए ये फैसला लिया और कहा कि CrPC की धारा 125 देश की सभी महिलाओं के लिए लागू होती है, चाहे वे किसी भी धर्म से क्यों न हो. आपको बता दें कि तेलंगाना के एक व्यक्ति ने सीआरपीसी की धारा 125 में तलाकशुदा पत्नी को भरण-पोषण दिए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में आगे कहा गया कि अब मुस्लिम महिलाएं भी धारा 125 के तहत अपने भरण-पोषण के लिए गुजारा भत्ते की मांग कर सकेंगी.

CRPC की धारा 125 क्या कहती है?
CRPC की धारा 125 के उन लोगों को अधिकार प्रदान करती है जो कि खुद का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं. इस धारा में पत्नियों, बच्चों और माता-पिता को अपने भरण-पोषण के लिए गुजारा भत्ता लेने के लिए अधिकार प्राप्त हैं. इस धारा के मुताबिक वो महिला जिसे उसके पति ने तलाक दे दिया है या फिर किसी वजह से महिला ने तलाक लिया है और वो फिर से शादी नहीं करती तो उसको अधिकार है कि वो अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ता ले सकती है.

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को सुनाते हुए कहा कि CrPC की धारा 125 हर तरह से धर्मनिरपेक्ष है. चाहें कोई पति-पत्नी हिंदू हों या मुस्लिम, ईसाई हों या पारसी, ये प्रावधान सभी पर लागू हो सकता है. जिसमें ये माना गया कि मुस्लिम तलाकशुदा महिला CrPC की धारा 125 के तहत अपना भरण-पोषण मांगने की हकदार है.

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