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मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने, ‘सौर जागरूकता स्मारिका पुस्तिका’ का किया विमोचन।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, गजा घण्टाकर्ण महोत्सव का किया भव्य शुभारम्भ।
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उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने किया, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय का औचक निरीक्षण।
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विकासखण्ड पोखड़ा का हो रहा है चहुंमुखी विकास, सतपाल महाराज।
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गर्मी से राहत के आसार, कल से कई जनपदों में बारिश के लिए, जारी किया गया आरेंज अलर्ट।
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मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने, अल्मोड़ा को दी 138 करोड़ की सौगात।
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नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से की भेंट, कृषि मंत्री गणेश जोशी।
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सीएम धामी ने अल्मोड़ा में, राज्य स्तरीय एसडीजी एचीवर्स अवार्ड समारोह में, विजेताओं को किया सम्मानित।
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मुख्य सचिव ने पीएम पोषण योजना के तहत, अधिक से अधिक स्कूलों का सोशल ऑडिट कराए जाने के दिए निर्देश।
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धार्मिक स्थलों या तीर्थस्थलों के संबंध में, कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जायेगा, सुप्रीम कोर्ट।

धार्मिक स्थलों या तीर्थस्थलों के संबंध में, कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जायेगा, सुप्रीम कोर्ट।

देहरादून/नई दिल्ली :- सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को निर्देश दिया कि धार्मिक स्थलों या तीर्थस्थलों के संबंध में कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता है या जिला अदालतों द्वारा सर्वेक्षण का आदेश तब तक नहीं दिया जा सकता है जब तक कि उपासना स्थल अधिनियम, 1991 की वैधता से संबंधित मामला उसके समक्ष लंबित है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा, “जब मामला इस अदालत के समक्ष विचाराधीन है तो क्या अन्य लोगों के लिए इस पर अपना हाथ नहीं डालना उचित नहीं होगा।” शीर्ष अदालत ने कहा कि हालांकि नए मुकदमे दायर किए जा सकते हैं लेकिन उन्हें पंजीकृत नहीं किया जाएगा और जिला अदालतों द्वारा कोई प्रभावी आदेश पारित नहीं किया जाएगा।

साथ ही शीर्ष अदालत ने 1991 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को चार सप्ताह का और समय दिया। याचिकाओं के एक समूह पर विचार करते हुए अदालत ने यह भी कहा कि कानून के क्रियान्वयन की मांग करने वाली याचिका पर भी केंद्र द्वारा कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। नवगठित पीठ ने नए मुकदमों पर विचार करने पर रोक लगाने के आदेश के विरोध को खारिज कर दिया। कानून की वैधता को चुनौती देने वालों की ओर से पेश वकीलों ने इस आदेश का विरोध किया था। पीठ ने कहा, “मुकदमे दायर किए जाने पर भी कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती। जब मामला इस अदालत के समक्ष विचाराधीन है तो क्या दूसरों के लिए इस पर रोक लगाना उचित नहीं होगा। जब तक हम मामले की जांच नहीं कर लेते, तब तक कोई प्रभावी आदेश या सर्वेक्षण आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

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