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मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का हो तय समय पर सत्यापन, सीईओ।
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कुमाऊँ में भी शिक्षा-स्वास्थ्य की नई अलख जगाए एसजीआरआर ग्रुप, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा।
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कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किसानों को निःशुल्क बीज किए वितरित, सेब-कीवी बागानों और पॉलीहाउस को बढ़ावा देने के दिए निर्देश।
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प्रदेश में खुलेगी सहकारी बैंक की 34 नई शाखाएं, डाॅ. धन सिंह रावत।
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सीबीआरआई, रुड़की में भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव, 2025 का कर्टेन रेज़र कार्यक्रम आयोजित।

सीबीआरआई, रुड़की में भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव, 2025 का कर्टेन रेज़र कार्यक्रम आयोजित।

इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के कर्टेन रेज़र कार्यक्रम के इस वर्ष की थीम “विज्ञान से समृद्धि: आत्मनिर्भर भारत है”।

आईआईएसएफ 2025 का उद्देश्य वैज्ञानिकों, नवोन्मेषकों, शिक्षकों, छात्रों, उद्योग विशेषज्ञों, विज्ञान संचारकों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाना है। 

11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल का कर्टेन रेज़र कार्यक्रम 17 नवंबर 2025 को आरएनटी ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ। 

देहरादून/रुड़की :- सीएसआईआर–केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीबीआरआई), रुड़की द्वारा 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) 2025 का कर्टेन रेज़र कार्यक्रम 17 नवंबर 2025 को आरएनटी ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस वर्ष इस उत्सव का समन्वयन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस), भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिरियोलॉजी (आईआईटीएम), पुणे नोडल संस्थान है। आईआईएसएफ 2025 दिनांक 6–9 दिसंबर 2025 तक पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में आयोजित किया जाएगा। 

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई तथा उसके उपरांत राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ओडीएस प्रमुख डॉ. नीरज जैन ने किया, जिन्होंने सभी अतिथियों, निदेशक, संकाय सदस्यों, वैज्ञानिकों तथा छात्रों का स्वागत किया। उन्होंने आईआईएसएफ तथा आज के कर्टेन रेज़र कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष का थीम “विज्ञान से समृद्धि : आत्मनिर्भर भारत है”। उन्होंने कहा कि आईआईएसएफ 2025 का उद्देश्य वैज्ञानिकों, नवोन्मेषकों, शिक्षकों, छात्रों, उद्योग विशेषज्ञों, विज्ञान संचारकों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाना है ताकि सहयोग, सृजनशीलता और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दिया जा सके।

कार्यक्रम में सीएसआईआर–सीबीआरआई के वरिष्ठतम वैज्ञानिक डॉ. डी. पी. कानूनगो तथा मुख्य अतिथि डॉ. आशीष रतुड़ी, प्रोफेसर, भौतिकी विभाग, डॉल्फिन इंस्टिट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज़, देहरादून एवं सदस्य, विज्ञान भारती की गरिमामयी उपस्थिति रही। माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नं. 1 तथा बाल विद्या मंदिर के विद्यार्थियों ने संकाय सदस्यों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। डॉ. डी. पी. कानूनगो ने विद्यार्थियों को जीवन के सभी क्षेत्रों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के महत्व के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय समृद्धि, नवाचार और सतत विकास की आधारशिला है। उन्होंने युवा मस्तिष्कों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें भारत की आत्मनिर्भरता में योगदानकर्ता बनने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह उत्सव विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की असीम भावना का उत्सव है। आईआईएसएफ उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति, आत्मनिर्भरता और सतत विकास की नींव है। सीएसआईआर–सीबीआरआई के निदेशक डॉ. आर. प्रदीप कुमार ने भी आईआईएसएफ 2025 कर्टन रेज़र के लिए अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं और इसे वैज्ञानिक जागरूकता एवं सहयोग को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आशीष रतूड़ी ने विद्यार्थियों के लिए खगोल विज्ञान पर रोचक और प्रेरणादायी व्याख्यान दिया। उन्होंने वैज्ञानिक शिक्षा में भौतिकी के महत्व, खगोल विज्ञान की आवश्यकता, लेंस एवं दूरबीनों के विकास, साइंस सफारी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तथा आकाश को समझने में खगोल विज्ञान की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विज्ञान भारती और IISF के मिशन के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तीव्र तकनीकी परिवर्तनों के इस युग में भारत को ऐसे नवोन्मेषकों की आवश्यकता है जो वास्तविक समस्याओं जैसे जलवायु, स्वास्थ्य सेवा, कृषि तथा डिजिटल परिवर्तन का समाधान कर सकें। आईआईएसएफ हमें साहसपूर्वक सोचने, निडर होकर प्रयोग करने और सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।

आज का कर्टेन रेज़र केवल एक कार्यक्रम की शुरुआत नहीं, बल्कि एक सामूहिक यात्रा का प्रारंभ है जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर भारत की बढ़ती भूमिका और ज्ञान-आधारित, समावेशी एवं सतत भविष्य के निर्माण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। व्याख्यान के उपरांत डॉ. रतुरी का सम्मान डॉ. डी. पी. कानूनगो द्वारा मोमेंटो भेंट कर किया गया। इसके अतिरिक्त सीएसआईआर-सीबीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सौमित्रा मैती द्वारा “बिल्डिंग मटेरियल्स के विकास हेतु अपशिष्ट उपयोगिता” विषय पर व्याख्यान दिया गया, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा प्रदूषण एवं कार्बन फुटप्रिंट में कमी के महत्व पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हेमलता द्वारा आभार-प्रदर्शन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। तत्पश्चात विद्यार्थियों ने सीएसआईआर-सीबीआरआई के ग्रामीण प्रौद्योगिकी पार्क का भ्रमण किया। इसके अतिरिक्त हरियाणा के केंद्रीय विश्वविद्यालय के 50 विद्यार्थियों ने सीबीआरआई द्वारा विकसित विभिन्न प्रमुख प्रयोगशाला सुविधाओं और प्रदर्शनी गैलरी का भ्रमण किया।

इस कार्यक्रम में डॉ. पी. सी. थपलियाल, विनीत सैनी, डॉ. तबिश आलम, डॉ. चंचल, डॉ. अनिंद्य पाइन, राजेंद्र, रजनीश, रजत, अनुज, कु. इक़रा, कु. राशी, कु. संस्कृति आदि उपस्थित रहे।

 

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