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श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के खेलोत्सव में शतरंज, टेबल टेनिस और बैडमिंटन के रोमांचक मुकाबले।
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राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन से, लोक भवन में डीजीपी दीपम सेठ ने की शिष्टाचार भेंट।
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छात्रावासों में डिजिटल क्लासरूम और आधुनिक लाइब्रेरी से हाईटेक होगी शिक्षा।
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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्टेट स्टीयरिंग कमेटी की हुई बैठक, उत्तराखंड के युवाओं को स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार से जोड़ने पर जोर।
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अर्धकुंभ मेला के लिए उत्तराखण्ड को केन्द्र से, 14,520 मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद्यान्न आवंटित।
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विशेष दिव्यांग शिविरों में 150 दिव्यांगजनों को जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्र।
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मौसम विभाग के अलर्ट के दृष्टिगत मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को सतर्क रहने के दिए निर्देश।
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न्याय की देवी की मूर्ति में बदलाव, अब पट्टी हटी, हाथ में तलवार की जगह संविधान।

न्याय की देवी की मूर्ति में बदलाव, अब पट्टी हटी, हाथ में तलवार की जगह संविधान।

देहरादून/नई दिल्ली :- अक्सर आपने सुना होगा कि “कानून अंधा होता है,” लेकिन अब यह कहावत पुरानी हो चुकी है। न्याय की देवी की नई मूर्ति का अनावरण किया गया है, जिसमें कई अहम बदलाव किए गए। अब न्याय की देवी की आंखों पर कोई पट्टी नहीं है, और तलवार की जगह उनके हाथ में भारत का संविधान नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के निर्देश पर अदालतों में लगने वाली इस मूर्ति में बदलाव किए गए हैं, जो एक बड़ा संदेश दे रहे हैं।

क्यों हटाई गई पट्टी?
पहले न्याय की देवी की आंखों पर बंधी पट्टी यह दर्शाती थी कि न्याय बिना पक्षपात के, सभी के लिए समान होता है। लेकिन अब इस पट्टी को हटा दिया गया है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि कानून अंधा नहीं है और हर व्यक्ति को निष्पक्ष और स्पष्ट दृष्टि से देखा जाएगा। यह बदलाव लोगों के बीच कानून और न्याय की प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ाने की कोशिश है।

तलवार की जगह संविधान
पहले न्याय की देवी के बाएं हाथ में तलवार हुआ करती थी, जिसे अब हटा दिया गया है। इसके स्थान पर संविधान रखा गया है, जो यह संदेश देता है कि हर फैसला विधि के अनुरूप और संविधान के आधार पर होगा। यह बदलाव न्यायिक प्रक्रिया में आधुनिकता और संवैधानिक मूल्यों को प्रदर्शित करता है।

नई मूर्ति का स्वागत
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने न्यायिक प्रक्रिया में पुराने ब्रिटिश कालीन प्रतीकों को बदलने की पहल की है। यह कदम न्यायपालिका की छवि में भारतीयता और समयानुसार बदलाव लाने का प्रयास है। संविधान की मूल भावना—समानता का अधिकार—अब इस मूर्ति के जरिए प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देगा, और इस बदलाव का समाज के हर वर्ग में स्वागत हो रहा है।

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